सरकारी दफ्तर

आरटीआई आवेदन दर्ज करें

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत किसी केंद्र सरकार के मंत्रालय, विभाग या दफ्तर से सूचना मांगने के लिए। उत्तराखंड के किसी राज्य विभाग के लिए आरटीआई ऑनलाइन उत्तराखंड पर दर्ज करें।

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पहले यह करें

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    जांच लें कि आपके लिए कौन सा पोर्टल सही है

    यह गाइड उस सूचना के लिए है जो किसी केंद्र सरकार के मंत्रालय, विभाग या दफ्तर के पास हो, जैसे आयकर विभाग, रेलवे या कोई केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम। उत्तराखंड के किसी राज्य विभाग, बोर्ड या विश्वविद्यालय के लिए आरटीआई ऑनलाइन उत्तराखंड का इस्तेमाल करें।

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    अपनी मांग स्पष्ट रूप से लिखें

    आपको जो सूचना चाहिए, उसका स्पष्ट विवरण दें। इसकी वजह बताना ज़रूरी नहीं है।

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    ₹10 तैयार रखें

    किसी केंद्रीय लोक प्राधिकरण को आवेदन करने की फीस ₹10 है, जो ऑनलाइन भरी जा सकती है। यदि आप गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) हैं, तो अपने बीपीएल प्रमाणपत्र की प्रति के साथ यह मुफ्त है।

चरण दर चरण

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    सुनिश्चित करें कि यह केंद्रीय लोक प्राधिकरण है

    यहां आरटीआई ऑनलाइन केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों और दफ्तरों के लिए है।

    यदि दफ्तर उत्तराखंड राज्य सरकार, किसी राज्य विभाग, निगम, जिला पंचायत या राज्य विश्वविद्यालय द्वारा चलाया जाता है, तो आरटीआई ऑनलाइन उत्तराखंड पर दर्ज करें। राज्य प्राधिकरण के लिए केंद्रीय पोर्टल पर दर्ज किए गए आवेदन वापस कर दिए जाते हैं, और फीस भी वापस नहीं होती।

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    अपना आवेदन लिखें

    आपको जो सूचना चाहिए, उसका विवरण दें। इसे स्पष्ट और सीमित रखें। फॉर्म 500 शब्दों तक के लिए बनाया गया है, लेकिन सिर्फ इससे अधिक लंबा होने पर इसे खारिज नहीं किया जा सकता। ऑनलाइन फॉर्म के टेक्स्ट बॉक्स में लगभग 3,000 अक्षर आ सकते हैं; यदि आपका आवेदन इससे लंबा है, तो बाकी हिस्सा एक पीडीएफ में डालकर "Supporting Document" ["सहायक दस्तावेज़"] के अंतर्गत अपलोड करें।

    आरटीआई अधिनियम की धारा 6(2) के तहत, सूचना मांगने की वजह बताना ज़रूरी नहीं है। आपको सिर्फ अपना संपर्क विवरण देना होता है।

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    फॉर्म भरें, फीस भरें और जमा करें

    आरटीआई ऑनलाइन पर "Submit Request" ["आवेदन जमा करें"] पर जाएं, मंत्रालय या विभाग चुनें, और फॉर्म भरें। खाता बनाना ज़रूरी नहीं है, लेकिन खाता बनाने से आप अपने पुराने आवेदन देख सकते हैं।

    पोर्टल पर ₹10 फीस ऑनलाइन भरें। यह फीस सूचना का अधिकार नियम, 2012 के नियम 3 के तहत तय है। यदि आप गरीबी रेखा से नीचे हैं, तो कोई फीस नहीं लगती; इसके बजाय अपने बीपीएल प्रमाणपत्र की प्रति लगाएं।

    जमा करने के बाद आपको एक पंजीकरण नंबर मिलेगा। इसे सुरक्षित रखें। स्थिति जानने, कोई अतिरिक्त फीस भरने या अपील करने के लिए इसकी ज़रूरत पड़ेगी।

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    यदि आपने गलत लोक प्राधिकरण चुना है

    आरटीआई अधिनियम की धारा 6(3) के तहत, यदि सूचना किसी अन्य लोक प्राधिकरण के पास है, या उससे अधिक निकटता से जुड़ी है, तो जिस प्राधिकरण को आपने आवेदन दिया था, उसे आवेदन मिलने के 5 दिन के भीतर इसे स्थानांतरित करना होगा और आपको इसकी सूचना देनी होगी।

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    जवाब का इंतज़ार करें

    आरटीआई अधिनियम की धारा 7(1) के तहत, केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी को आपका आवेदन मिलने के 30 दिन के भीतर जवाब देना होगा। यदि सूचना आपके जीवन या स्वतंत्रता से जुड़ी है, तो जवाब 48 घंटे के भीतर देना होगा।

    यदि फोटोकॉपी या अन्य खर्चों के लिए अतिरिक्त फीस की ज़रूरत हो, तो पोर्टल पर "View Status" ["स्थिति देखें"] के साथ-साथ ईमेल या एसएमएस से भी आपको बताया जाएगा। इसे भी उसी तरह भरें। इस सूचना और आपके भुगतान के बीच की अवधि में 30 दिन की गिनती रुक जाती है।

    30 दिन के भीतर जवाब न मिलना अस्वीकृति माना जाता है, और आप प्रथम अपील दर्ज कर सकते हैं। यदि प्राधिकरण 30 दिन की समय-सीमा पार कर देता है, तो धारा 7(6) के तहत आपको सूचना मुफ्त में दी जाती है।

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    अस्वीकृत या अनुत्तरित होने पर प्रथम अपील

    आरटीआई अधिनियम की धारा 19(1) के तहत, अस्वीकृति के, या 30 दिन की समय-सीमा खत्म होने के 30 दिन के भीतर अपील दर्ज करें। यह उसी लोक प्राधिकरण में केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी से वरिष्ठ रैंक के अधिकारी के पास जाती है, जिसे प्रथम अपीलीय प्राधिकारी कहा जाता है। इसके लिए कोई फीस नहीं लगती।

    धारा 19(6) के तहत, प्रथम अपीलीय प्राधिकारी को अपील मिलने के 30 दिन के भीतर, या अतिरिक्त समय का कारण लिखित रूप में दर्ज करने पर अधिकतम 45 दिन के भीतर, फैसला देना चाहिए।

    आप यह अपील ऑनलाइन केवल तभी दर्ज कर सकते हैं जब आपने आवेदन भी ऑनलाइन दर्ज किया हो। यदि आपने कागज़ पर आवेदन दिया था, या आपका आवेदन कागज़ पर उस दफ्तर को भेजा गया था जो पोर्टल पर नहीं है, तो अपील भी कागज़ पर भेजें।

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    सूचना आयोग को द्वितीय अपील

    अब भी अस्वीकृति मिली है, या प्रथम अपीलीय प्राधिकारी ने कोई फैसला नहीं दिया? आरटीआई अधिनियम की धारा 19(3) के तहत, प्रथम अपीलीय प्राधिकारी का फैसला मिलने की तारीख से, या फैसला न आने पर उसकी देय तारीख से, 90 दिन के भीतर द्वितीय अपील दर्ज करें।

    किसी केंद्रीय लोक प्राधिकरण के लिए यह केंद्रीय सूचना आयोग के पास जाती है। उत्तराखंड राज्य प्राधिकरण के लिए यह उत्तराखंड राज्य सूचना आयोग के पास जाती है।

सावधान रहें

  • आरटीआई ऑनलाइन केंद्रीय आरटीआई के लिए आधिकारिक पोर्टल है। फीस लेकर आपकी आरटीआई दर्ज करने का दावा करने वाली निजी वेबसाइटें सरकार नहीं हैं।
  • गलत पोर्टल पर आवेदन दर्ज करने से, यदि मामला राज्य से जुड़ा निकले, तो फीस वापस नहीं मिलती, इसलिए पहले जांच लें।

अधिवक्ता कब मदद कर सकता है

आवेदन आप स्वयं लिख और दर्ज कर सकते हैं। अटकने पर एक अधिवक्ता मदद करता है:

  • केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी के अस्वीकार करने या जवाब न देने पर, प्रथम अपील तैयार करना और दर्ज करना
  • प्रथम अपील से मामला हल न होने पर, सूचना आयोग को द्वितीय अपील करना
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स्रोत

आख़िरी बार को जाँचा गया। कुछ पुराना लगा?

यह गाइड आधिकारिक माध्यमों से शिकायत दर्ज करने का तरीका बताता है। यह कानूनी सलाह नहीं है।