पुलिस शिकायत या ई-एफआईआर दर्ज करें
पुलिस को अपराध की सूचना देने के लिए: संज्ञेय अपराध क्या माना जाता है, एफआईआर कैसे दर्ज कराएँ, और उत्तराखंड पुलिस ऑनलाइन क्या सुविधा देती है। थाने जाने से पहले इसे पढ़ें।
पहले यह करें
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अगर किसी की जान को खतरा है, तो पहले 112 पर कॉल करें
पुलिस, फायर और एम्बुलेंस, सभी 112 पर जवाब देते हैं। अगर खतरा अभी भी बना हुआ है, तो कुछ और करने से पहले यह कॉल करें।
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संज्ञेय अपराध के लिए कोई भी थाना आपकी एफआईआर दर्ज कर सकता है
आपको यह ढूँढने की ज़रूरत नहीं कि अपराध किस थाने के इलाके में हुआ। इसकी सूचना किसी भी थाने में दें। इसे जीरो एफआईआर कहते हैं, और वह थाना इसे सही थाने तक भेज देता है।
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जो हुआ उसे ताज़ा रहते हुए लिख लें
तारीख, समय, जगह, कौन शामिल था और क्या कहा या किया गया। आप इसे अपनी शिकायत के तौर पर दे सकते हैं, या इसे पढ़कर सुना सकते हैं ताकि पुलिस इसे सही तरीके से लिख ले।
चरण दर चरण
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जाँचें कि यह संज्ञेय अपराध है या असंज्ञेय
इससे तय होता है कि पुलिस को क्या करना होगा। संज्ञेय अपराध ज़्यादा गंभीर अपराधों में आता है: चोरी, लूट, धोखाधड़ी, गंभीर चोट पहुँचाना। इनके लिए पुलिस को एफआईआर दर्ज करनी होती है, और वह बिना वारंट जाँच और गिरफ्तारी कर सकती है।
3 साल या उससे ज़्यादा लेकिन 7 साल से कम की सज़ा वाले अपराधों में, पुलिस किसी वरिष्ठ अधिकारी की मंज़ूरी से पहले एक छोटी प्राथमिक जांच कर सकती है, जो 14 दिनों के भीतर पूरी होनी चाहिए।
असंज्ञेय अपराध कम गंभीर होता है, जहाँ आम तौर पर किसी की जान को गंभीर खतरा नहीं होता। इनके लिए पुलिस एफआईआर दर्ज करने के बजाय मामले को रजिस्टर में नोट करती है, और मैजिस्ट्रेट के आदेश के बिना जाँच नहीं कर सकती। अगर आपको यकीन न हो कि आपका मामला किस श्रेणी में आता है, तो थाने में यह बताएँ और उनसे समझाने के लिए कहें।
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थाना प्रभारी को अपनी जानकारी दें
आप संज्ञेय अपराध की सूचना खुद जाकर दे सकते हैं, या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भी, जहाँ थाना इसकी अनुमति देता है (उत्तराखंड पुलिस नागरिक पोर्टल के ज़रिए, उन सेवाओं के लिए जो यह सूचीबद्ध करता है)।
अगर आप खुद जाकर सूचना देते हैं और पुलिस इसे आपके लिए लिखती है, तो हस्ताक्षर करने से पहले इसे पढ़ लें और सुनिश्चित करें कि यह आपकी बात से मिलता है।
अगर आप इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सूचना देते हैं, तो इसे रिकॉर्ड पर लेने के लिए आपको फिर भी 3 दिनों के भीतर हस्ताक्षर करना होगा। ऑनलाइन सूचना देते समय यह ध्यान रखें: फॉलो-अप करें और खुद जाकर या पोर्टल के निर्देश के अनुसार हस्ताक्षर करें।
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अपनी एफआईआर की मुफ्त कॉपी माँगें
आपकी एफआईआर दर्ज होने के बाद, आपको इसकी एक कॉपी तुरंत, मुफ्त में मिलने का अधिकार है। अगर किसी और ने अपराध की सूचना दी है, तो पीड़ित होने के नाते आप भी मुफ्त कॉपी ले सकते हैं। अगर कोई आपसे इसकी कॉपी के लिए पैसे माँगे, तो यह गलत है।
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खास सेवाओं के लिए उत्तराखंड पुलिस के नागरिक पोर्टल का इस्तेमाल करें
उत्तराखंड पुलिस का नागरिक पोर्टल शिकायत दर्ज करना, साइबर अपराध शिकायत फॉर्म, एफआईआर की कॉपी माँगना, और किरायेदार या पीजी सत्यापन जैसी सुविधाएँ सूचीबद्ध करता है। इसमें वह अपराध जो यह कवर करता है उनके लिए एक अलग ई-एफआईआर लॉगिन भी है।
इस पोर्टल के लिए लॉगिन चाहिए। पोर्टल पर देखें कि कौन-सी शिकायतें ई-एफआईआर के तौर पर ऑनलाइन दर्ज की जा सकती हैं, या थाने में पूछ लें।
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असंज्ञेय अपराध के लिए, इसे रिकॉर्ड करने के लिए कहें
पुलिस आपकी सूचना का सार एक रजिस्टर में दर्ज करती है और आपको मैजिस्ट्रेट के पास भेजती है। वे मैजिस्ट्रेट के आदेश के बिना जाँच नहीं कर सकते। मैजिस्ट्रेट फिर पुलिस को जाँच करने का आदेश दे सकता है, जिसके बाद उनके पास संज्ञेय मामले जैसी ही शक्तियाँ होती हैं, सिवाय बिना वारंट गिरफ्तारी के।
सावधान रहें
- संज्ञेय अपराध में, पुलिस आपको यह कहकर नहीं लौटा सकती कि अपराध उनके इलाके के बाहर हुआ। इसके बजाय जीरो एफआईआर के लिए कहें।
- अगर कोई थाना आपकी एफआईआर दर्ज करने से पूरी तरह इनकार कर दे, तो इसके लिए एक अलग गाइड है: जब पुलिस आपकी एफआईआर दर्ज न करे तो क्या करें।
- थाने में किसी को भी शिकायत दर्ज करने या एफआईआर की कॉपी के लिए पैसे नहीं माँगने चाहिए।
अधिवक्ता कब मदद कर सकता है
ज़्यादातर अपराधों की सूचना आप खुद दे सकते हैं। एक अधिवक्ता इस तरह मदद कर सकता है:
- यह तय करने में कि आपका मामला संज्ञेय है या असंज्ञेय, और इसका आपके लिए क्या मतलब है
- खासकर आर्थिक या संपत्ति विवादों में अपनी शिकायत साफ-साफ तैयार करने में
- अगर पुलिस आपकी एफआईआर दर्ज करने से इनकार करे, तो आगे के कदमों में
स्रोत
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023, धारा 173 और 174 · गृह मंत्रालय
- उत्तराखंड पुलिस · उत्तराखंड पुलिस
- उत्तराखंड पुलिस नागरिक पोर्टल · उत्तराखंड पुलिस
आख़िरी बार को जाँचा गया। कुछ पुराना लगा?
यह गाइड आधिकारिक माध्यमों से शिकायत दर्ज करने का तरीका बताता है। यह कानूनी सलाह नहीं है।