उपभोक्ता समस्याएं

खराब सामान या घटिया सेवा: मरम्मत, बदलवाने या पैसे वापस कैसे पाएँ

ऐसे सामान के लिए जो खराब निकला हो या जो वादे के मुताबिक न हो, या जो सेवा ठीक से नहीं दी गई हो। इसमें विक्रेता से शिकायत करना, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन और उपभोक्ता आयोग का तरीका बताया गया है।

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आख़िरी बार को जाँचा गया3 चरणWhatsApp पर शेयर करें

पहले यह करें

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    विक्रेता या कंपनी से लिखित में शिकायत करें

    बताएँ कि क्या गड़बड़ है और आप क्या चाहते हैं: मरम्मत, बदलवाना या पैसे वापस। ईमेल, कंपनी के ऐप या उसकी वेबसाइट का इस्तेमाल करें ताकि एक लिखित रिकॉर्ड बन जाए।

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    राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर कॉल करें

    अगर विक्रेता जवाब नहीं देता तो यह मुफ्त मदद और शिकायत दर्ज कराने की जगह है।

    1915 पर कॉल करें
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    हर कागज़ रखें

    बिल या इनवॉइस, वारंटी कार्ड, खराबी की फोटो या वीडियो, और विक्रेता को लिखी गई बातों की कॉपी।

कहाँ शिकायत करें

पहले विक्रेता और राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर कोशिश करें। आयोग का रास्ता तब अपनाएँ जब वह काम न करे।

आपको क्या चाहिएविक्रेता को गड़बड़ी बताएँकहाँविक्रेता या कंपनी, लिखित मेंकबसमस्या दिखते ही जल्द से जल्द
आपको क्या चाहिएविक्रेता से जवाब दिलाने में मुफ्त मददकहाँराष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन
consumerhelpline.gov.in ↗
1915 पर कॉल करें
कबअगर विक्रेता जवाब न दे
आपको क्या चाहिएमरम्मत, बदलवाने, पैसे वापस या मुआवज़े का आदेशकहाँउपभोक्ता आयोग (ई-जागृति पर दर्ज करें)
e-jagriti.gov.in ↗
कबसमस्या के 2 साल के भीतर

चरण दर चरण

  1. 1

    पहले विक्रेता या कंपनी को लिखित में बताएँ

    खराबी या घटिया सेवा के बारे में बताएँ और साफ-साफ कहें कि आप क्या चाहते हैं: मरम्मत, बदलवाना या पैसे वापस। जवाब देने के लिए उचित समय-सीमा दें।

    सिर्फ फोन कॉल न करें, कंपनी के ऐप, उसकी वेबसाइट के शिकायत फॉर्म या ईमेल का इस्तेमाल करें, ताकि आपके पास लिखित कॉपी रहे।

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    राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर अपनी शिकायत दर्ज करें

    1915 पर कॉल करें (सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक), या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन की वेबसाइट, उसके मोबाइल ऐप, उमंग ऐप या व्हाट्सऐप के ज़रिए दर्ज करें। वेबसाइट पर आप अपनी शिकायत की स्थिति भी देख सकते हैं और दस्तावेज़ अपलोड कर सकते हैं।

    आपकी शिकायत को एक डॉकेट नंबर मिलता है और इसे कंपनी के पास भेजा जाता है। कई कंपनियाँ इस चरण पर ही मामला सुलझा लेती हैं, आगे जाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।

    consumerhelpline.gov.in ↗
    1915 पर कॉल करें
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    अब भी हल नहीं हुआ? ई-जागृति पर उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करें

    उपभोक्ता आयोग विक्रेता को मरम्मत, बदलवाने या पैसे वापस करने का आदेश दे सकता है, और मुआवज़ा भी दिला सकता है। हो सके तो समस्या के 2 साल के भीतर शिकायत दर्ज करें।

    कौन सा आयोग सुनेगा यह आपके भुगतान की राशि पर निर्भर करता है: जिला आयोग ₹50 लाख तक की शिकायतें सुनता है, राज्य आयोग उससे ऊपर ₹2 करोड़ तक, और राष्ट्रीय आयोग ₹2 करोड़ से ऊपर। ज़्यादातर शिकायतें जिला आयोग में ही जाती हैं।

    e-jagriti.gov.in ↗

इसके बाद क्या होता है

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर आपकी शिकायत कंपनी को भेजी जाती है और आप ऑनलाइन उसकी स्थिति देख सकते हैं।

अगर आप उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करते हैं, तो सुनवाई से पहले विक्रेता को जवाब देने का मौका मिलता है। आयोग मरम्मत, बदलवाने, पैसे वापस करने या मुआवज़े का आदेश दे सकता है।

ज़्यादा इंतज़ार न करें: उपभोक्ता आयोग में शिकायत समस्या के 2 साल के भीतर दर्ज होनी चाहिए। देरी का सही कारण बताने पर बाद की शिकायत भी स्वीकार हो सकती है, लेकिन इस पर भरोसा न करें।

सावधान रहें

  • मामला सुलझने तक सामान, उसका डिब्बा और सभी सबूत रखें। बदलवाने से पहले विक्रेता खराब सामान की जाँच करने को कह सकता है।
  • वारंटी कार्ड या विक्रेता की अपनी रिटर्न पॉलिसी से उपभोक्ता आयोग में जाने का आपका अधिकार खत्म नहीं होता।

अधिवक्ता कब मदद कर सकता है

ऊपर दिए सभी कदम आप खुद उठा सकते हैं। जब मामला फँस जाए तो एक अधिवक्ता इस तरह मदद करता है:

  • विक्रेता या कंपनी के जवाब देना बंद करने पर उसे कानूनी नोटिस भेजना
  • उपभोक्ता आयोग में आपकी शिकायत तैयार करना और दर्ज करना
  • विक्रेता के विरोध करने पर आयोग में आपका प्रतिनिधित्व करना
अधिवक्ता से मदद लेंन्यायसेतु फ़ीस 10% (कम से कम ₹99) · कोटेशन मंज़ूर करने पर ही भुगतान करें

स्रोत

आख़िरी बार को जाँचा गया। कुछ पुराना लगा?

यह गाइड आधिकारिक माध्यमों से शिकायत दर्ज करने का तरीका बताता है। यह कानूनी सलाह नहीं है।

1915 पर कॉल करें↗